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Sidh Ayurvedic

       ◆सिद्ध कब्जहरण गोली,◆


सिद्ध अयूर्वादिक
◆सिद्ध कब्जहरण गोली,◆

हरड़ 10 ग्राम,
छोटी पीपल 10 ग्राम
अजवाइन 10 ग्राम
बेल चुर्ण 10 ग्राम
सौंफ 10 ग्राम

को लेकर पीसकर थूहर के दूध में मिलाकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर प्रतिदिन सुबह 1 या 2 गोली पानी के साथ खाने से पेट का फूलना और कब्ज दूर होती है।

■हम आप की सेवा में है■
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अधरंग, पक्षाघात (लकवा) की अयूर्वादिक दवा


​        

सिद्ध अयूर्वादिक
           अधरंग, पक्षाघात (लकवा)

               की अयूर्वादिक दवा

किसी भी प्रकार लकवा  मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, शरीर के एक तरफ का लकवा, सकम्प लकवा 

सभी के यह दवा कारगर है।
त्रिफला        100 ग्राम

अजवाइन     100  ग्राम

गिलोय         100 ग्राम

चरायता        50 ग्राम

करेला चुर्ण    50 ग्राम

तुसली पंचाग 50 ग्राम

सोंठ भुनी      50 ग्राम

अकरकरा      50 ग्राम

राई               50 ग्राम

सर्पगंधा        50 ग्राम

शुद्ध गुग्गुल   50 ग्राम

दालचीनी     50 ग्राम

कलौंजी       50 ग्राम

तिल काले    50 ग्राम

कालीमिर्च    50 ग्राम

अजमोद।    25 ग्राम

सौंफ           25 ग्राम

बबूना          25 ग्राम

बालछड़       25 ग्राम

नकछिनी      25  ग्राम 

जायफल       25 ग्राम

पिपली          25 ग्राम

काला नमक  50 ग्राम

सभी को चुर्ण बनाकर 300 ग्राम ताजा एलोवेरा रस 

में मिला ले। 5 दिन सायं में सुखाए।

आप तुरंत भी उपयोग कर सकते हैं।

इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है।

◆◆

सेवन विधि-1 चम्मच चुर्ण को 50 मिलीलीटर एलोवेरा

ताजा रस को 200 ग्राम मिलाकर सेवन करे।

दिन में 4 बार पहले 15 दिन ले।

15 दिन बाद दिन 3 बार ले।

फिर

15 दिन बाद 2 बार लेते रहे ।

90 दिन पूरा कोर्स करे।

पुराना लकवा भी ठीक होगा

★★

लकवा तेल बनाए
तिल का तेल।       50 ग्राम

निर्गुण्डी का तेल   50 ग्राम

अजवायन का तेल 50 ग्राम

बादाम का तेल       50 ग्राम

सरसों का तेल        50 ग्राम

विषगर्भ तेल           50 ग्राम

कलौजी तेल           50  ग्राम

10 ग्राम लहसुन,5 ग्राम बारीक पीसी हुई अदरक, 10 ग्राम काली उडद की दाल  50 ग्राम कपूर टिकी तेल में मिलाकर 5 मिनट तक गर्म करें। 
इस तेल से दिन में 5 बार मालिश करते रहे

■■■
      ★अयूर्वादिक लकवा दवा के फायदे★
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।

यह भूख ,नींद औऱ शरीरक कमजोरी को दूर करेगी।

★★★

रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।

यह अयूर्वादिक दवा शून्यता को दूर कर अंग में हरक़त कायम करती।

★★★

                 ★लकवा रोगी ध्यान दे★
दवा के साथ आप इस बात पर ध्यान दे आप जल्दी बीमारी से छुटकारा पा लेंगे।

लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
★★★
      ★लकवा में इन चीजों से बचकर ही रहे★
इस रोग में नमक बहुत कम या बिलकुल न लेना अच्छा होता हैं. आरम्भ में भोजन में अन्न लेना भी ठीक नहीं. लकवा के रोगी को चाय, चीनी, तालीभुनि चीजें, नशे की चीजें, मसाले आदि उत्तेजक खाद्य से परहेज करना चाहिए. उसे ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
मानसिक उद्वेगों चिंता क्रोध तथा भय से बचना चाहिए. उसे न तो ठंडा पानी पीना चाहिए और न ठन्डे पानी से स्नान ही करना चाहिए. नया चावल, कुम्हड़ा, गूढ़, भैंस का दूध, उड़द की दाल, घुइया, भिंडी, रतालू, तरबूज, बासी ठंडी, चीजें, रात्रि जागरण, पाखाना-पेशाब रोकना, बर्फ का सेवन आदि इस रोग में वर्जित हैं.

★★★
★लकवा में दवा के साथ साथ उपवास करे ★

              डबल फायदा होगा
उपवास के दिनों में केवल जल अथवा कागजी नीबू का रस मिले जल के सिवा कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए. उन दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके 2-3 सेर या अधिक पानी रोज जरूर पीना चाहिए. जिस दिन उपवास किया जाए, उस दिन शाम को और फिर उपवास काल में रोज सबेरे या शाम को दिन में एक बार सेर डेढ़ सेर गुन-गुने पानी का एनिमा जरूर लेना चाहिए.
अगर एक दिन का उपवास किया जाए तो दूसरे दिन फल खाने के बाद, तीसरे दिन भोजन किया जा सकता हैं. अगर तीन दिन का उपवास किया जाए तो चौथे दिन केवल फल या तरकारियों का सूप पांचवे दिन फल और छठे दिन सुबह शाम को फल और दोपहर को थोड़ी रोटी और सब्जी लेनी चाहिए. फिर साधारण भोजन पर आ जाना चाहिए।
Online मंगवाए।

सिद्ध अयूर्वादिक

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  ★सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा★



सिद्ध अयूर्वादिक
        ★सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा★
श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिया (Leukorrhea) या “सफेद पानी आना” स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है।
ल्‍यूकोरिया स्त्री की योनि से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। योनि मार्ग से आने वाले सफेद और चिपचिपे गाढ़े स्राव को ल्‍यूकोरिया कहते हैं। कभी-कभी योनि से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह सामान्य होता है। लेकिन कई बार योनि से निकलते स्राव में ज़्यादा चिपचिपापन, जलन, खुजली, गंध होती है जिसके कारण यह ज़्यादा परेशानी का कारण बनता है।
लिकोरिया होने के लक्षण : 
★पेट के निचले हिस्से और टांगो में दर्द रहना

★बार बार पेशाब आना

★योनी के आस पास खुजली होना

★सम्भोग के दौरान दर्द महसूस होना

★थकावट ज्यादा रहना

★कब्ज़ होना

★गर्भ न ठहरना

★खाया पीया न लगना।

★ शरीर का कमजोर होना।
★★★

लकोरिया की दवा
कौंचबीज बीज 100 ग्राम

आवला चुर्ण     100  ग्राम

तुलसी बीज     100  ग्राम

कीकर फली     100  ग्राम

सतावरी           100  ग्राम

सफेद मूसली    100  ग्राम

मिश्री               100  ग्राम

शतावरी            50 ग्राम

मुलहठी            50 ग्राम

छोटी इलायची के बीज 25 ग्राम

सभी लो मिलाकर चुर्ण बनाए।
कैसे सेवन करे।

दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले।

कम से कम 21 दिन कोर्स करे।

अगर पुराना लकोरिया रोग है तो 90 दिन कोर्स करे।

★★

साथ मे यह जरूर करे

नीम पत्ती 200 ग्राम 100 ग्राम फिटकरी को 2 लीटर

में उबालकर कर बोतल में भर ले।
दिन में 5 से 7 वार इस पानी से योनि की सफाई करे।

या
योनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें, इसके लिए आप गुनगुने पानी में कुछ बूँद डेटॉल का डालकर साफ करें।
सेक्स करने के बाद अपने प्राइवेट पार्ट को धोना न भूलें।
यूरिन पास करने के बाद पानी से साफ करें।
सेक्स के समय कंडोम क प्रयोग करें।
अपने अंडरगारमेंट को अच्छे से साफ करें।
★★

        ★लिकोरिया में खान-पान और परहेज★ 
आहार कारक leucorrhea में एक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। आहार खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, फलों और डेयरी उत्पाद का सेवन भी मददगार है। मुख्य रूप से फल और सब्जियों विशेष रूप से केला, क्रैनबेरी, नारंगी, नींबू, काले प्लम, भिन्डी, पत्तेदार साग, प्याज, भूरा चावल, दही, साथ ही जड़ी-बूटियों और मसालों जैसे अदरक, लहसुन, मेथी और धनिया आदि खाने चाहिए। दैनिक आधार पर एक या दो पके केले खाएं। ताज़ा क्रैनबेरी रस का एक गिलास पियें। बहुत से खाद्य पदार्थ हैं जिन्हें नहीं खाना चाहिए जैसे अंडे, मांस, रोटी, मशरूम, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल हैं जिन्हें किण्वित किया गया है।

दवा online मंगवा सकते हैं।

किसी भी शरीरक  स्मयसा के लिए  contact करे।

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हम बता रहे हैं दांत दर्द का अयूर्वादिक इलाज

सिद्ध अयूर्वादिक

हम बता रहे हैं दांत दर्द का
अयूर्वादिक इलाज

आप खुद इलाज करे।

दाँत दर्द में हमें बड़ी कठनाई का सामना करना पड़ता है । कई बार कुछ गलत खाने से तो कई बार दांतों की ठीक से सफाई न करने या कीड़े लगने के कारण दांतों में दर्द होने लगता है. दांतों में दर्द का कारण कोई भी हो, लेकिन इसकी पीड़ा हमारे लिए बेहद कष्टकारी बन जाती है। यहाँ पर हम आपको दाँत दर्द में कुछ बहुत ही आसान से उपचार बता रहे है।

*पिसी हल्दी, नमक व सरसो का तेल मिलाकर पेस्ट सा बना कर उसे डिब्वे में रख ले सुबह इस पेस्ट को ब्रुश अथवा उगली के द्वारा दाँतों व मसूड़ों पर लगा लें थोड़ी देर लगा कर रखे फिर बाद में कुल्ला कर लें इस प्रयोग से हिलते हुए दाँत जम जाते हैं दाँतो से पीलापन दुर होकर दाँत विल्कुल सफेद हो जाते हैं।इस प्रयोग करते रहने से कभी भी पायरिया नही होगा।

*नींबू के छिलकों पर थोड़ा-सा सरसों का तेल डालकर दाँत एवं मसूढ़ों पर लगाने से दाँत सफेद एवं चमकदार होते हैं, मसूढ़े मजबूत होते हैं, हर प्रकार के जीवाणुओं तथा पायरिया आदि रोगों से बचाव होता है।

*जामफल के पत्तों को अच्छी तरह चबाकर उसका रस मुँह में फैलाकर, थोड़ी देर तक रखकर थूक देने से अथवा जामफल की छाल को पानी में उबालकर उसके कुल्ले करने से हर तरह के दाँत के दर्द में लाभ होता है।

*हींग दांत में दर्द से तुरंत मुक्ति दिलाता है । हींग को मौसमी के रस में डुबोकर दांतों में दर्द की जगह पर रखें, मौसमी न होने पर हींग में नींबू भी मिलाया जा सकता है। इससे शीघ्र ही आपको दर्द से छुटकारा मिल जायेगा।

*तिल के तेल में पीसा हुआ नमक मिलाकर उँगली से दाँतों को रोज घिसने से दाँत की पीड़ा दूर होती है ।

*दांतों के दर्द में लौंग दांतों के सभी बैक्टीरिया को नष्ट कर सकता हैं। ऐसे में लौंग को दांतों के दर्द की जगह पर रखना चाहिए, कुछ ही देर में आपका दर्द जाता रहेगा। लेकिन चूँकि इसमें दर्द कम होने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी होती है इसलिए इसमें धैर्य रखना चाहिए ।

*जामुन के वृक्ष की छाल के काढ़े के कुल्ले करने से दाँतों के मसूढ़ों की सूजन मिटती है व हिलते दाँत भी मजबूत होते हैं।

*प्याज दांत दर्द के लिए एक उत्तम घरेलू उपचार है। जो व्यक्ति रोजाना कच्चा प्याज खाते हैं उन्हें दांत दर्द की शिकायत होने की संभावना कम रहती है क्योंकि प्याज में कुछ ऐसे औषधीय गुण होते हैं जो बैकटीरिया को नष्ट कर देते हैं। अगर आपके दांत में दर्द है तो प्याज के टुकड़े को दांत के पास रखें अथवा प्याज चबाएं। आपको आराम महसूस होने लगेगा।

*10 ग्राम बायविडंग और 10 ग्राम सफेद फिटकरी थोड़ी कूटकर तीन किलो पानी में उबालें। एक किलो बचा रहने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। तेज दर्द में दिन में 2-3 बार इस पानी से कुल्ला करने से दो दिन में ही आराम आ जाता है। कुछ अधिक दिन कुल्ला करने से दाँत पत्थर की तरह मजबूत हो जाते हैं।

*प्रायः दाढ़ में कीड़ा लगने पर असहय दर्द उठता है। तब अमरूद के पत्ते के काढ़े से कुल्ला करने से दाँत और दाढ़ की भयानक टीस और दर्द दूर हो जाता है। पतीले में पानी में अमरूद के पत्ते डालकर इतना उबालें कि वह पानी उबाले हुए दूध की तरह गाढ़ा हो जाए।

*नमक के पानी के कुल्ले करने एवं कत्थे अथवा हल्दी का चूर्ण लगाने से गिरे हुए दाँत का रक्तस्राव जल्दी ही बंद हो जाता है।

*लहसुन में एंटीबायोटिक गुण पाए जाते हैं जो अनेकों प्रकार के संक्रमण से लड़ने की क्षमता रखते हैं।लहसुन में एलीसिन होता है जो दांत के पास के बैकटीरिया, जर्म्स, जीवाणु इत्यादि को नष्ट कर देता है।इसलिए एक फांक लहसुन को सेंधा नमक के साथ पीसकर यदि आप दांतों में दर्द की जगह पर लगायेंगे तो आपको दर्द में आराम मिलेगा।

*दाँत-दाढ़ दर्द में अदरक का टुकड़ा कुचलकर दर्द वाले दाँत में रखकर मुँह बंद कर लें और धीरे-धीरे रस चूसते रहें। फौरन राहत महसूस होगी।

*नीम के पत्तों की राख में कोयले का चूरा तथा कपूर मिलाकर रोज रात को सोने से पहले लगाकर पायरिया में लाभ होता है।

*सरसों के तेल में सेंधा नमक मिलाकर दाँतों पर लगाने से दाँतों से निकलती दुर्गन्ध एवं रक्त बंद होकर दाँत मजबूत होते हैं तथा पायरिया भी जड़ से ख़त्म हो जाता है।

*फिटकरी को तवे या लोहे की कड़ाही में पानी के साथ आग पर रखें। जब पानी जल जाए और फिटकरी फूल जाए तो तवे को आग पर से उतारकर फिटकरी को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। जितना फिटकरी का पावडर बने उसका 1/4 भाग पिसी हल्दी उसमें मिला कर लकड़ी की सींख की नोक से दाँत के दर्द वाले स्थान पर या सुराख के भीतर यह मिश्रण भर दें।यह बहुत ही लाभकारी प्रयोग है ।

*भोजन अथवा अन्य किसी भी पदार्थ को खाने के बाद अच्छी तरह से कुल्ला जरूर करें तथा गर्म वस्तु के तुरंत पश्चात् ठण्डी वस्तु का सेवन न करें।

किसी भी शरीरक समस्या के लिए whats करे 9417862262

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★कैंसर की अयूर्वादिक दवा★

सिद्ध अयूर्वादिक

★कैंसर की अयूर्वादिक दवा★
गुर्दे का कैंसर
रीढ़ की हड्डी का कैंसर
खून का कैंसर
पेट का कैंसर
हड्डी कैंसर
सभी गांठ रोग में यह योग काम करता है।
★★★

क्या है अयूर्वादिक कैंसर दवा

सतावर चूर्ण 200 ग्राम
अश्वगंधा 100 ग्राम
गिलोय चुर्ण 100 ग्राम
इंद्ररायाण अजवाइन 100 ग्राम
तुलसी पंचाग 100 ग्राम
नीम पंचाग 100 ग्राम
सोंठ 100 ग्राम
मेथी दाना 50 ग्राम
चरायता। 50 ग्राम
अम्बा हल्दी। 50 ग्राम
लाल चित्रक। 50 ग्राम
कलौंजी 50 ग्राम
दालचीनी 50 ग्राम
खुरासानी कुटकी 50 ग्राम
मदार की जड़ 50 ग्राम
कचनार छाल चूर्ण। 50 ग्राम
फिटकरी (भुनी) 50 ग्राम
ताम्र सिंदूर 25 ग्राम
इमली चुर्ण 25 ग्राम

सभी को कूटकर कर 500 मिलीलीटर गुमूत्र में मिलाकर धूप में सुखाए।
जब यह सुख जाए तो
दिन में 3 बार गुमूत्र से सेवन करे।
50 मिलीलीटर गुमूत्र ले 150 मिलीलीटर पानी में मिलाकर कर 3 ग्राम दवा सेवन करे।
★★

साथ मे यह करते रहे-:

1 मिट्टी के बर्तन में 300 मिलीलीटर पानी भर लें। इसमें 12 ग्राम अजवायन, 12 ग्राम मोटी सौंफ, दो बादाम की गिरी रात को भिगो दें।

सुबह पानी के साथ छानकर इनको पत्थर के सिलबट्टे पर पीसें। इनको पीसने में इन्हें भिगोकर छाना हुआ पानी ही काम में लें।

फिर 21 पत्ते तुलसी के तोड़कर, धोकर इस पिसे पेस्ट में डालकर फिर से बारीक पीसें और छानकर रखे पानी में स्वाद के अनुसार मिश्री पीसकर घोलें।

अन्त में पेस्ट मिलाकर कपड़े से छान लें और पीयें। यह सारा काम पीसकर, घोल बनाकर पीना, सब सूर्य उगने से पहले करें। सूर्य उगने के बाद बनाकर पीने से लाभ नहीं होगा।

इसे करीब 21 दिनों तक सेवन करें। जब तक लाभ न हो, आगे भी पीते रहें। इससे हर प्रकार के कैंसर से लाभ होता है।
★★★

अनार दाना और इमली को रोजाना सेवन करते रहने से कैंसर के रोगी को आराम मिलता है और उसकी उम्र 10 वर्ष के लिए और बढ़ सकती है।

★★

अंगूर का सेवन करें, 1 दिन में दो किलो से ज्यादा अंगूर न खायें। कुछ दिनों के बाद छाछ पी सकते हैं और कोई चीज खाने को न दें। इससे लाभ धीरे-धीरे महीनों में होगा। कभी-कभी अंगूर का रस लेने से पेट दर्द, मलद्वार पर जलन होती है। इससे न डरे। दर्द कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। दर्द होने के बाद इसे सेंक सकते हैं। इस प्रयोग से कैंसर की बीमारी में आराम मिलता है।

◆◆

दही के लगातार सेवन से कैंसर होने की संभावना नहीं रहती है।
★★★

गेहूं के नये पौधों का रस रोजाना सुबह-शाम पीने से कैंसर रोग ठीक हो जाता है।आधा कप गेहूं धोकर किसी बर्तन में दो कप ताजा पानी डालकर रख दें। 12 घंटे के बाद उस पानी को सुबह-शाम पीयें। लगातार 8-10 दिनों में ही रोग भागने लगेगा और 2-3 महीने के लगातार प्रयोग से कैंसर रोग से मरने वाला प्राणी रोग मुक्त हो जाएगा।

कैंसर भी शरीर की एक स्थिति मात्र है, जो यह बताती है कि अदभुत यंत्र में कोई खराबी है।

प्रकृति हमेशा शरीर में संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है। कुछ लोग कैंसर से पीड़ित होते है और कुछ को अन्य बीमारियां।

यह इसलिए कि सबके जीने का ढंग अलग-अलग होता है। एक महिला की छाती में कैंसर था वह सभी प्रकार की चिकित्सा कराकर निराश हो चुकी थी।

उसको सभी प्रकार के रसों का आहार दिया गया तो वह कुछ ही महीनों में ठीक हो गई। इसी प्रकार एक ल्यूकीमिया के रोगी को पानी को एनिमा देकर पेट साफ किया गया और बाद में एनिमा से ही आंतों में गेहूं के पौधे का रस पहुंचाया गया और वह रोगी भी ठीक हो गया।

◆◆◆

लहसुन के सेवन से पेट का कैंसर नहीं होता है। खाना-खाने के बाद 2 लहसुन को चबाकर 1 गिलास पानी के साथ पीयें। पेट कैंसर होने पर लहसुन को पानी में पीसकर कुछ दिनों तक पीयें। इससे लाभ होगा।
◆◆

तांबे के लोटे में रात को पानी भरकर रख दें। सुबह इसी पानी को पीयें। इससे कैंसर में लाभ होगा।
◆◆
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गठिया की दवा

सिद्ध आयुर्वेदिक

गठिया की दवा

गिलोय चूर्ण- 100 ग्राम
मैथी दाना -100 ग्राम
अजवायन -100ग्राम
काली जीरी – 50 ग्राम
कड़ु – 50 ग्राम
सुरजन जीरी -50 ग्राम
हारसिंगार के -50 ग्राम
पते
नागौरी असगन्ध -50ग्राम
सौंठ -50 ग्राम
अलसी बीज -50 ग्राम

* कैसे सेवन करें *
2 से 3 ग्राम दिन में 3 बार दूध के साथ सेवन करें
साथ यह काढ़ा जरूर शामिल कीजिए ।? असगंधरिषट+महारास्नादि काढा और
दशमूलारिष्टा 2-2 चम्मच मिलाकर 3 बार लें ।

★जिन का यूरिक एसीड ठीक नही होता वो यह दवा ले★

*कब तक सेवन करना चाहिए *
यूरिक एसिड के लिए 21 से 45 दिन तक
गठिया में 90 दिन से 180 दिन
तक सेवन करें ।

नोट : –
खूद दवा तैयार करें ।
हम आपके साथ रहेंगे ।
दवा शुरू कर हमे काल जरूर करते रहे ।
हम आप का ह्रदय से साथ देगे ।
094178 -62263